भूमिका: अल्पतमांक (Least Count) का महत्व
मैकेनिकल इंजीनियरिंग और औद्योगिक कार्यों में ‘सटीकता’ (Accuracy) ही सब कुछ है। किसी भी काम की क्वालिटी इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितने सूक्ष्म स्तर पर मापा गया है। यहाँ पर एक शब्द सबसे महत्वपूर्ण हो जाता है— अल्पतमांक (Least Count)।
सरल शब्दों में, किसी भी मापक यंत्र (Measuring Instrument) द्वारा ली जा सकने वाली सबसे छोटी और सटीक माप को उसका ‘अल्पतमांक’ या ‘लीस्ट काउंट’ कहते हैं।
यदि आपको किसी टूल का लीस्ट काउंट पता नहीं है, तो आप उससे सही माप कभी नहीं ले सकते। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि अलग-अलग टूल्स का लीस्ट काउंट कैसे निकाला जाता है।
1. लीस्ट काउंट का मूल सिद्धांत (Basic Principle)
हर मापक यंत्र में एक ‘मेन स्केल’ (Main Scale) होता है। यदि यंत्र अधिक सटीक है, तो उसमें एक सहायक स्केल (जैसे वर्नियर स्केल या थिम्बल स्केल) भी होता है। लीस्ट काउंट निकालने का सामान्य सूत्र है:
Least Count = मुख्य स्केल के एक छोटे भाग का मान / सहायक स्केल पर कुल भागों की संख्या
2. विभिन्न उपकरणों का लीस्ट काउंट (Calculation for Different Tools)
A. स्टील रूल (Steel Rule)
स्टील रूल सबसे साधारण मापक यंत्र है। इसमें मुख्य स्केल ही होता है।
- गणना: यदि 1 cm को 20 बराबर भागों में बांटा गया है, तो:
- $1 \text{ cm} = 10 \text{ mm}$
- सबसे छोटा भाग = $10 \text{ mm} / 20 = 0.5 \text{ mm}$
- लीस्ट काउंट: $0.5 \text{ mm}$।

B. वर्नियर कैलिपर (Vernier Caliper)
वर्नियर कैलिपर दो स्केल के अंतर पर काम करता है: मेन स्केल और वर्नियर स्केल।
- सूत्र: $LC = 1 \text{ MSD (Main Scale Division)} – 1 \text{ VSD (Vernier Scale Division)}$
- उदाहरण: यदि मेन स्केल का एक भाग $1 \text{ mm}$ है और वर्नियर स्केल के 50 भाग मेन स्केल के 49 भागों के बराबर हैं:
- $1 \text{ VSD} = 49/50 \text{ mm} = 0.98 \text{ mm}$
- $LC = 1 \text{ mm} – 0.98 \text{ mm} = \mathbf{0.02 \text{ mm}}$

C. माइक्रोमीटर (Micrometer)
माइक्रोमीटर ‘पिच’ और ‘सर्कुलर स्केल’ के सिद्धांत पर काम करता है।
- सूत्र: $LC = \frac{\text{Pitch (स्पिंडल द्वारा एक चक्कर में चली दूरी)}}{\text{Circular Scale (Thimble) पर कुल भागों की संख्या}}$
- उदाहरण: यदि माइक्रोमीटर की पिच $0.5 \text{ mm}$ है और थिम्बल पर 50 भाग हैं:
- $LC = 0.5 \text{ mm} / 50 = \mathbf{0.01 \text{ mm}}$
3. सूक्ष्म माप कैसे लें? (How to Take Fine Measurements)
किसी भी टूल से सबसे छोटी माप लेने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:
- जीरो एरर (Zero Error) चेक करें: माप शुरू करने से पहले देखें कि क्या टूल के दोनों स्केल के ‘0’ आपस में मिल रहे हैं। यदि नहीं, तो उस अंतर (Error) को अंतिम माप में जोड़ें या घटाएं।
- मेन स्केल रीडिंग (MSR) पढ़ें: देखें कि सहायक स्केल का ‘0’ मेन स्केल के किस अंक को पार कर चुका है।
- मैचिंग लाइन खोजें: सहायक स्केल (Vernier या Thimble) की वह लाइन खोजें जो मेन स्केल की किसी भी लाइन से बिल्कुल सीधी मिल रही हो।
- गणना करें: > कुल माप = MSR + (मैचिंग लाइन संख्या × Least Count)
4. तुलनात्मक तालिका: विभिन्न यंत्रों की सूक्ष्मता
| मापक यंत्र | लीस्ट काउंट (Metric) | लीस्ट काउंट (English/Inch) |
| स्टील रूल | 0.5 mm | 1/64 inch |
| वर्नियर कैलिपर | 0.02 mm | 0.001 inch |
| माइक्रोमीटर | 0.01 mm | 0.0001 inch |
| वर्नियर बेवल प्रोटेक्टर | 5 मिनट (5′) | – |
5. लीस्ट काउंट का महत्व (Significance)
- टोलरेंस (Tolerance): इंजीनियरिंग ड्राइंग में दिए गए टोलरेंस के अनुसार सही टूल चुनने में मदद मिलती है। (जैसे अगर टोलरेंस $0.05 \text{ mm}$ है, तो आप स्टील रूल का उपयोग नहीं कर सकते)।
- इंटरचेंजेबिलिटी (Interchangeability): जब पुर्जे सटीक माप में बनते हैं, तभी वे दुनिया के किसी भी कोने में फिट हो सकते हैं।
- रिजेक्शन कम करना: सही लीस्ट काउंट वाले टूल के उपयोग से खराब माल (Rejection) बनने की संभावना कम हो जाती है।
निष्कर्ष
अल्पतमांक (Least Count) केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि यह आपके काम की शुद्धता की गारंटी है। एक कुशल आईटीआई छात्र या मैकेनिक को हर टूल का लीस्ट काउंट ज़ुबानी याद होना चाहिए और उसे निकालने की विधि पता होनी चाहिए। याद रखें, जितना छोटा लीस्ट काउंट होगा, यंत्र उतना ही अधिक ‘प्रिसिजन’ (Precision) वाला होगा।
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