पिस्टन और उसके सहायक पुर्जे (Piston and Components): इंजन का गतिशील हृदय

Piston and Components

भूमिका: पिस्टन क्या है?

पिस्टन (Piston) इंजन का वह सबसे महत्वपूर्ण गतिशील भाग है जो दहन कक्ष (Combustion Chamber) में ईंधन के जलने से उत्पन्न होने वाली गैसों के दबाव को ग्रहण करता है। यह सिलेंडर के भीतर ऊपर-नीचे (Reciprocating motion) गति करता है और इस शक्ति को कनेक्टिंग रॉड के माध्यम से क्रैंकशाफ्ट तक पहुँचाता है।

पिस्टन को अत्यधिक गर्मी (लगभग $2000^\circ\text{C}$ से ऊपर) और भारी दबाव को सहन करना पड़ता है, इसलिए इसे आमतौर पर एल्युमीनियम अलॉय (Aluminum Alloy) या कास्ट आयरन से बनाया जाता है।


1. पिस्टन के मुख्य भाग (Parts of a Piston)

एक पिस्टन के कई हिस्से होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का विशिष्ट कार्य है:

  • Piston Head/Crown: पिस्टन का सबसे ऊपरी हिस्सा जो सीधे धमाके की गर्मी और दबाव को झेलता है।
  • Piston Skirt: पिस्टन का निचला हिस्सा जो इसे सिलेंडर के अंदर सीधा रखने और गाइड करने में मदद करता है।
  • Piston Pin (Gudgeon Pin): यह पिस्टन और कनेक्टिंग रॉड के छोटे सिरे (Small end) को आपस में जोड़ता है।
  • Ring Grooves: पिस्टन के ऊपरी हिस्से पर बने खांचे जिनमें पिस्टन रिंग्स फिट की जाती हैं।

2. पिस्टन रिंग्स (Piston Rings)

पिस्टन सिलेंडर के अंदर बिल्कुल सटकर नहीं चलता, बल्कि इनके बीच थोड़ा गैप होता है। इस गैप को सील करने का काम पिस्टन रिंग्स करती हैं। ये मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:

  1. कंप्रेशन रिंग (Compression Ring): ये सबसे ऊपर होती हैं। इनका काम दहन के दौरान गैसों को नीचे लीक होने (Blow-by) से रोकना है ताकि इंजन की पावर कम न हो।
  2. ऑयल रिंग (Oil Ring): यह नीचे की ओर होती है। इसमें छोटे छेद होते हैं। इसका कार्य सिलेंडर की दीवारों पर लगे अतिरिक्त लुब्रिकेटिंग तेल को खुरचकर वापस नीचे ऑयल पैन में भेजना है, ताकि तेल जलने से बच सके।


3. कनेक्टिंग रॉड (Connecting Rod)

यह पिस्टन और क्रैंकशाफ्ट के बीच की एक कड़ी है।

  • Small End: यह पिस्टन पिन (Gudgeon Pin) के साथ जुड़ता है।
  • Big End: यह क्रैंकशाफ्ट के क्रैंकपिन के साथ जुड़ता है।

इसका मुख्य कार्य पिस्टन की ऊपर-नीचे वाली गति को रोटरी गति में बदलने के लिए क्रैंकशाफ्ट को धक्का देना है।


4. पिस्टन के सहायक पुर्जे (Supporting Components)

  • गजन पिन (Gudgeon Pin/Piston Pin): यह केस-हार्डन स्टील की बनी एक खोखली पिन होती है जो पिस्टन को कनेक्टिंग रॉड से जोड़ती है।
  • सिरक्लिप्स (Circlips): गजन पिन अपनी जगह से बाहर न निकल जाए और सिलेंडर की दीवार को न खुरचे, इसके लिए पिन के दोनों ओर छोटे लॉक (Circlips) लगाए जाते हैं।
  • बेयरिंग्स (Bearings): कनेक्टिंग रॉड के सिरों पर घर्षण कम करने के लिए शेल बेयरिंग या नीडल बेयरिंग का उपयोग किया जाता है।

5. पिस्टन में होने वाले सामान्य दोष

  1. Piston Slap: जब पिस्टन और सिलेंडर के बीच गैप ज्यादा हो जाता है, तो पिस्टन टकराने लगता है जिससे आवाज आती है।
  2. Piston Seizure: इंजन अधिक गर्म होने या तेल की कमी होने पर पिस्टन पिघलकर सिलेंडर से चिपक जाता है।
  3. Ring Sticking: कार्बन जमने के कारण रिंग्स जाम हो जाती हैं, जिससे कंप्रेशन कम हो जाता है और धुआं निकलने लगता है।

निष्कर्ष

पिस्टन इंजन का वह ‘मजदूर’ है जो लगातार धमाकों के बीच काम करता है। पिस्टन और उसकी रिंग्स की सही स्थिति ही इंजन की बेहतर ‘माइलेज’ और ‘पिकअप’ सुनिश्चित करती है। एक मैकेनिक के लिए पिस्टन रिंग्स के बीच के रिंग एंड गैप’ (Ring End Gap) को मापना सबसे महत्वपूर्ण कौशल है।

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