
मीशो (MEESHO) भारत का एक प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जो मुख्य रूप से वैल्यू–फर्स्ट और हाइपरलोकल अप्रोच पर आधारित है।
1. कोर मॉडल: रीसेलर–केंद्रित (Reseller-Centric)
मीशो का मूल बिज़नेस मॉडल रीसेलिंग (Reselling) पर आधारित था।
- रीसेलर (Micro-Entrepreneur): मीशो छोटे व्यवसायों, गृहिणियों और छात्रों को अपने प्लेटफॉर्म से उत्पाद उठाकर, उन्हें सोशल मीडिया (जैसे WhatsApp, Instagram) पर बेचने की अनुमति देता है।
- ज़ीरो कमीशन मॉडल: मीशो विक्रेताओं (Suppliers) से किसी भी तरह का कमीशन नहीं लेता है। यह इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जो इसे Amazon और Flipkart से अलग करती है।
2. रिवेन्यू स्ट्रीम्स (Revenue Streams) – मीशो पैसा कैसे कमाता है?
चूंकि मीशो कमीशन नहीं लेता है, इसलिए यह मुख्य रूप से तीन तरीकों से पैसा कमाता है:
| तरीका (Method) | विवरण (Description) |
| I. विज्ञापन (Advertising/Monetization) | मीशो अपनी वेबसाइट और ऐप पर विक्रेताओं को अपने उत्पादों को प्रमोट (Boost) करने के लिए चार्ज करता है। यह राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है। |
| II. लॉजिस्टिक्स और शिपिंग शुल्क | मीशो विक्रेताओं से उनके उत्पादों को ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए एक शिपिंग और लॉजिस्टिक्स शुल्क लेता है। यह शुल्क आमतौर पर उद्योग मानकों के अनुरूप होता है। |
| III. वित्तीय सेवाएँ (Financial Services) | यह विक्रेताओं को कार्यशील पूंजी ऋण (Working Capital Loans) और अन्य वित्तीय उत्पाद बेचकर भी आय अर्जित करता है। |
3. USP (Unique Selling Proposition): मीशो की सबसे बड़ी ताकत
मीशो की सफलता के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- मूल्य फोकस (Value Focus): मीशो मुख्य रूप से टियर-2, टियर-3 शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहकों को टारगेट करता है, जो किफायती और सस्ते उत्पादों की तलाश में रहते हैं।
- सोशल कॉमर्स: इसने सोशल मीडिया के माध्यम से खरीद-बिक्री को बढ़ावा दिया, जिससे डिजिटल रूप से कम जानकार ग्राहक भी आसानी से खरीदारी कर सके।
4. वर्तमान रणनीति (Current Strategy)
हाल ही में, मीशो ने रीसेलर मॉडल से हटकर डायरेक्ट–टू–कंज्यूमर (D2C) मॉडल पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है, जो इसे Amazon/Flipkart के सीधे मुकाबले में लाता है, लेकिन यह अभी भी कम कीमत वाले सेगमेंट पर केंद्रित है।
महत्वपूर्ण सूचना: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार और IPO में निवेश जोखिम के अधीन होता है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से सलाह अवश्य लें।