लिमिट्स, फिट्स और टॉलरेंस (Limits, Fits, and Tolerances) – इंजीनियरिंग का सटीक विज्ञान

limits filts and tolerance

भूमिका: इनकी आवश्यकता क्यों है?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में जब हम दो पुर्जों (जैसे एक शाफ्ट और एक होल) को आपस में जोड़ते हैं, तो वे कभी भी बिल्कुल सटीक (Exact) साइज के नहीं बन सकते। यदि हमें $25$ mm की शाफ्ट बनानी है, तो मशीनिंग के दौरान वह $24.98$ mm या $25.02$ mm की बन सकती है।

इसी अंतर को प्रबंधित करने के लिए लिमिट्स, फिट्स और टॉलरेंस का उपयोग किया जाता है, ताकि पुर्जे आपस में सही ढंग से फिट हो सकें और खराब न हों।


1. लिमिट्स (Limits)

किसी पुर्जे के निर्माण के लिए निर्धारित किए गए अधिकतम और न्यूनतम साइज को ‘लिमिट्स’ कहते हैं।

  • Upper Limit: पुर्जे का वह सबसे बड़ा साइज जो स्वीकार्य है।
  • Lower Limit: पुर्जे का वह सबसे छोटा साइज जो स्वीकार्य है।

उदाहरण: यदि ड्राइंग पर साइज $20 \pm 0.05$ mm लिखा है, तो:

  • Upper Limit = $20.05$ mm
  • Lower Limit = $19.95$ mm

2. टॉलरेंस (Tolerance)

अपर लिमिट और लोअर लिमिट के बीच के अंतर (Difference) को टॉलरेंस कहते हैं। यह वह ‘छूट’ है जो कारीगर को दी जाती है ताकि वह काम आसानी से कर सके।

$$\text{Tolerance} = \text{Upper Limit} – \text{Lower Limit}$$


3. फिट्स (Fits)

दो मिलने वाले पुर्जों (Mating Parts) के बीच के संबंध को ‘फिट’ कहते हैं। यह बताता है कि पुर्जे आपस में कितने ढीले या टाइट फिट होंगे।

A. क्लीयरेंस फिट (Clearance Fit)

इसमें होल का साइज हमेशा शाफ्ट के साइज से बड़ा होता है। इससे शाफ्ट होल के अंदर आसानी से घूम सकती है या सरक सकती है।

  • उदाहरण: छत के पंखे की शाफ्ट और बेयरिंग।

B. इंटरफेरेंस फिट (Interference Fit)

इसमें शाफ्ट का साइज होल के साइज से बड़ा होता है। इन्हें जोड़ने के लिए दबाव (Force) या पुर्जे को गर्म/ठंडा करने की ज़रूरत होती है। यह फिट बहुत मज़बूत होता है।

  • उदाहरण: रेल की पटरी के पहिये पर चढ़ाया जाने वाला टायर।

C. ट्रांजिशन फिट (Transition Fit)

यह क्लीयरेंस और इंटरफेरेंस के बीच की स्थिति है। इसमें पुर्जे कभी थोड़े ढीले तो कभी थोड़े टाइट हो सकते हैं।

  • उदाहरण: कपलिंग्स और की-वे (Keyways)।

4. होल बेसिस और शाफ्ट बेसिस सिस्टम

इंजीनियरिंग में फिटिंग के लिए दो प्रणालियाँ अपनाई जाती हैं:

  1. होल बेसिस सिस्टम (Hole Basis System): इसमें होल का साइज स्थिर रखा जाता है और शाफ्ट के साइज को बदलकर वांछित फिट प्राप्त किया जाता है। (यह सबसे ज्यादा उपयोग होता है क्योंकि छेद को छोटा-बड़ा करना मुश्किल है, लेकिन शाफ्ट को छीलना आसान है)।
  2. शाफ्ट बेसिस सिस्टम (Shaft Basis System): इसमें शाफ्ट का साइज स्थिर रखा जाता है और होल के साइज को बदला जाता है।

5. मुख्य शब्दावली (Terminology)

  • Basic Size: वह साइज जो ड्राइंग पर दिया जाता है (जैसे $50$ mm)।
  • Actual Size: वह साइज जो पुर्जा बनने के बाद मापने पर आता है।
  • Deviation: बेसिक साइज और एक्चुअल साइज के बीच का अंतर।
  • Allowance: जानबूझकर छोड़ा गया वह अंतर जो फिट की प्रकार (Type of Fit) तय करता है।

निष्कर्ष

बिना ‘लिमिट्स और फिट्स’ के इंटरचेंजेबिलिटी (Interchangeability) मुमकिन नहीं है। इसी तकनीक की वजह से आज हम किसी भी खराब बोल्ट की जगह नया बोल्ट खरीदकर लगा पाते हैं, क्योंकि वे एक ही स्टैंडर्ड लिमिट में बने होते हैं।

read more topics

मैकेनिक ट्रेड का फुल कोर्स क्लिक करे

ट्रांसमिशन सिस्टम (Transmission System) को समझे

Scroll to Top