सरल मशीनें: लीवर और पुली (Levers and Pulleys) की कार्यप्रणाली

Levers and Pulleys

भूमिका: सरल मशीनें (Simple Machines) क्या हैं?

सरल मशीनें वे उपकरण हैं जो कम बल (Effort) लगाकर भारी काम को आसान बना देते हैं। मैकेनिकल वर्कशॉप में भारी मशीनों को उठाने या पुर्जों को गति देने के लिए लीवर (Levers) और पुली (Pulleys) का सबसे अधिक उपयोग होता है। ये ‘मैकेनिकल एडवांटेज’ (Mechanical Advantage) के सिद्धांत पर काम करते हैं।


1. लीवर (Levers)

लीवर एक सीधी या मुड़ी हुई छड़ होती है जो एक निश्चित बिंदु के चारों ओर घूम सकती है। इसे समझने के लिए तीन बिंदुओं को जानना ज़रूरी है:

  1. फलक्रम (Fulcrum): वह स्थिर बिंदु जहाँ से लीवर मुड़ता है।
  2. लोड (Load): वह वजन जिसे उठाना है।
  3. एफर्ट (Effort): वह बल जो हम वजन उठाने के लिए लगाते हैं।

लीवर के तीन प्रकार:

  • प्रथम श्रेणी (First Class Lever): इसमें फलक्रम बीच में होता है।
    • उदाहरण: कैंची, प्लायर (Pliers), और शीशॉ (See-saw)।
  • द्वितीय श्रेणी (Second Class Lever): इसमें लोड (वजन) बीच में होता है।
    • उदाहरण: कचरा ढोने वाली गाड़ी (Wheelbarrow), नट क्रैकर।
  • तृतीय श्रेणी (Third Class Lever): इसमें एफर्ट (बल) बीच में लगाया जाता है।
    • उदाहरण: चिमटा (Tongs), मनुष्य का हाथ।

2. पुली (Pulleys)

पुली एक पहिया होता है जिसके चारों ओर रस्सी या बेल्ट चलती है। इसका मुख्य उद्देश्य भारी वजन को उठाना या बल की दिशा बदलना है।

पुली के मुख्य प्रकार:

  1. स्थिर पुली (Fixed Pulley): यह एक जगह फिक्स होती है। यह वजन कम नहीं करती, लेकिन बल लगाने की दिशा बदल देती है (जैसे कुएं से पानी खींचना)।
  2. चल पुली (Movable Pulley): यह पुली वजन के साथ ऊपर-नीचे चलती है। यह बल को आधा कर देती है, जिससे भारी वजन उठाना आसान हो जाता है।
  3. कंपाउंड पुली (Block and Tackle): इसमें कई स्थिर और चल पुली का समूह होता है। इसका उपयोग क्रेन और वर्कशॉप में भारी इंजन या मशीनरी उठाने के लिए किया जाता है।

3. मैकेनिकल एडवांटेज (Mechanical Advantage)

मैकेनिकल एडवांटेज (M.A.) हमें यह बताता है कि मशीन ने हमारे काम को कितना आसान बनाया है।

$$Mechanical Advantage (M.A.) = \frac{Load}{Effort}$$

उदाहरण: यदि आप $10$ kg का बल लगाकर $50$ kg का वजन उठा लेते हैं, तो उस मशीन का M.A. होगा 5


4. वर्कशॉप में उपयोग (Applications)

  • Crowbars (लीवर): भारी क्रेट्स या मशीनों को थोड़ा ऊपर उठाने के लिए।
  • Belt Drives (पुली): लेथ या ड्रिल मशीन में मोटर की पावर को स्पिंडल तक पहुँचाने के लिए।
  • Chain Hoist: वर्कशॉप की छत पर लगी पुली प्रणाली जो भारी लोहे के ब्लॉकों को उठाती है।

निष्कर्ष

लीवर और पुली भौतिकी के वे सरल नियम हैं जो बड़े से बड़े कारखाने को संभव बनाते हैं। एक मशीनिस्ट के रूप में, इन सिद्धांतों को समझना आपको यह जानने में मदद करता है कि कम शारीरिक श्रम के साथ भारी मशीनरी को कैसे नियंत्रित किया जाए।

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