
भूमिका: IC इंजन क्या है?
IC इंजन (Internal Combustion Engine) या ‘आंतरिक दहन इंजन’ वह मशीन है जिसमें ईंधन (Fuel) का दहन (Burning) इंजन के सिलेंडर के अंदर होता है। इस दहन से उत्पन्न उच्च दबाव और तापमान वाली गैसें पिस्टन पर बल लगाती हैं, जिससे रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy) को यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy) में बदला जाता है।
1. इंजन के मुख्य भाग (Main Components)
एक इंजन कई छोटे-बड़े पुर्जों से मिलकर बनता है, जिनमें से मुख्य ये हैं:
- सिलेंडर ब्लॉक (Cylinder Block): यह इंजन का मुख्य ढांचा है जिसमें सिलेंडर बने होते हैं।
- पिस्टन (Piston): सिलेंडर के अंदर ऊपर-नीचे गति करने वाला भाग।
- कनेक्टिंग रॉड (Connecting Rod): यह पिस्टन और क्रैंकशाफ्ट को जोड़ती है।
- क्रैंकशाफ्ट (Crankshaft): यह पिस्टन की रेखीय गति (Linear Motion) को घुमावदार गति (Rotary Motion) में बदलता है।
- वाल्व (Valves): इनलेट वाल्व (ईंधन अंदर लाने के लिए) और एग्जॉस्ट वाल्व (धुआं बाहर निकालने के लिए)।
- स्पार्क प्लग / इंजेक्टर: पेट्रोल इंजन में चिंगारी देने के लिए स्पार्क प्लग और डीजल इंजन में ईंधन स्प्रे करने के लिए इंजेक्टर।
2. 4-स्ट्रोक इंजन की कार्यप्रणाली (4-Stroke Cycle)
ज्यादातर वाहनों में 4-स्ट्रोक इंजन का उपयोग होता है। यह अपना एक चक्र (Cycle) चार चरणों में पूरा करता है:
- सक्शन स्ट्रोक (Suction/Intake Stroke): पिस्टन नीचे की ओर जाता है, इनलेट वाल्व खुलता है और हवा (या हवा-पेट्रोल का मिश्रण) सिलेंडर के अंदर आती है।
- कंप्रेशन स्ट्रोक (Compression Stroke): दोनों वाल्व बंद हो जाते हैं। पिस्टन ऊपर की ओर जाता है और हवा/मिश्रण को बहुत जोर से दबाता है।
- पावर स्ट्रोक (Power/Expansion Stroke): दहन होता है (स्पार्क या कंप्रेशन से)। धमाके के दबाव से पिस्टन पूरी ताकत के साथ नीचे धकेला जाता है। यही वह स्ट्रोक है जिससे गाड़ी को ताकत मिलती है।
- एग्जॉस्ट स्ट्रोक (Exhaust Stroke): एग्जॉस्ट वाल्व खुलता है, पिस्टन ऊपर आता है और जली हुई गैसों को बाहर निकाल देता है।
3. पेट्रोल बनाम डीजल इंजन (Petrol vs Diesel Engine)
| विशेषता | पेट्रोल इंजन (SI Engine) | डीजल इंजन (CI Engine) |
| ईंधन (Fuel) | पेट्रोल (आसानी से वाष्पित होने वाला) | डीजल (भारी और तैलीय) |
| मिश्रण | हवा और पेट्रोल का मिश्रण सिलेंडर में जाता है। | केवल शुद्ध हवा सिलेंडर में जाती है। |
| इग्निशन | स्पार्क प्लग की ज़रूरत होती है। | दबाव और गर्मी से अपने आप दहन होता है। |
| दक्षता (Efficiency) | कम होती है। | अधिक होती है। |
| रखरखाव | कम खर्चीला और हल्का। | भारी और रखरखाव अधिक। |
4. कूलिंग और लुब्रिकेशन (Cooling & Lubrication)
- कूलिंग: इंजन में लगातार धमाके होने से वह बहुत गर्म हो जाता है। इसे ठंडा रखने के लिए Air Cooling (फिन्स द्वारा) या Water Cooling (रेडिएटर द्वारा) का उपयोग होता है।
- लुब्रिकेशन: लोहे के पुर्जे आपस में घिसकर खराब न हों, इसके लिए ‘लुब्रिकेटिंग ऑयल’ (Engine Oil) का उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष
IC इंजन आधुनिक परिवहन की रीढ़ है। जहाँ पेट्रोल इंजन अपनी रफ्तार और कम शोर के लिए जाने जाते हैं, वहीं डीजल इंजन अपनी भारी ताकत (Torque) के लिए पहचाने जाते हैं। एक मैकेनिक के लिए इन दोनों के बीच के ‘कंप्रेशन रेश्यो’ और ‘वाल्व टाइमिंग’ को समझना सबसे महत्वपूर्ण है।