ग्राइंडिंग मशीन (Grinding Machine): टूल की धार तेज़ करना और सरफेस फिनिशिंग की पूरी जानकारी

Grinding Machine

भूमिका: ग्राइंडिंग मशीन क्या है?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्राइंडिंग (Grinding) एक फिनिशिंग प्रक्रिया है जिसमें एक घूमते हुए ग्राइंडिंग व्हील (Grinding Wheel) का उपयोग करके धातु की सतह से बहुत बारीक कणों के रूप में सामग्री को हटाया जाता है।

ग्राइंडिंग मशीन का मुख्य उद्देश्य जॉब को सटीक साइज देना, सतह को बेहद चिकना (Super finishing) बनाना और पुराने या कुंद (Blunt) हो चुके कटिंग टूल्स (जैसे छेनी, ड्रिल बिट, लेथ टूल) की धार को फिर से तेज़ करना है। इसे ‘एब्रेसिव मशीनिंग’ (Abrasive Machining) भी कहा जाता है क्योंकि ग्राइंडिंग व्हील छोटे-छोटे एब्रेसिव कणों से बना होता है जो हज़ारों छोटे कटिंग टूल्स की तरह काम करते हैं।


1. ग्राइंडिंग व्हील की बनावट (Composition of Grinding Wheel)

एक ग्राइंडिंग व्हील दो मुख्य चीजों से मिलकर बना होता है:

  1. एब्रेसिव (Abrasive): यह वह कठोर पदार्थ है जो धातु को काटता है (जैसे एल्युमीनियम ऑक्साइड या सिलिकॉन कार्बाइड)।
  2. बॉन्ड (Bond): यह वह गोंद या पदार्थ है जो एब्रेसिव कणों को आपस में जोड़कर रखता है।

2. ग्राइंडिंग मशीन के मुख्य प्रकार (Types of Grinding Machines)

वर्कशॉप में मुख्य रूप से दो प्रकार की मशीनें सबसे अधिक उपयोग की जाती हैं:

A. बेंच ग्राइंडर (Bench Grinder)

यह वर्कशॉप की बेंच पर फिट किया जाता है। इसमें एक मोटर के दोनों तरफ दो ग्राइंडिंग व्हील लगे होते हैं।

  • उपयोग: छेनी (Chisel), ड्रिल बिट और स्क्राइबर की धार तेज़ करने के लिए। आमतौर पर एक तरफ ‘रफ़’ (Rough) और दूसरी तरफ ‘फिनिश’ (Fine) व्हील लगा होता है।

B. सरफेस ग्राइंडर (Surface Grinder)

इसका उपयोग फ्लैट सतहों (Flat surfaces) को अत्यंत सटीक और चिकना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें जॉब को एक चुंबकीय चक (Magnetic Chuck) पर पकड़ा जाता है।

C. सिलिंड्रिकल ग्राइंडर (Cylindrical Grinder)

इसका उपयोग गोल या बेलनाकार जॉब्स के बाहरी व्यास को फिनिश करने के लिए किया जाता है।


3. टूल की धार तेज़ करने की प्रक्रिया (Tool Sharpening Process)

वर्कशॉप में टूल्स (जैसे लेथ टूल या ड्रिल) की धार तेज़ करते समय इन चरणों का पालन करना चाहिए:

  1. व्हील की जांच: सुनिश्चित करें कि व्हील कहीं से टूटा या चटका हुआ न हो।
  2. टूल रेस्ट एडजस्टमेंट: टूल रेस्ट (Tool Rest) और व्हील के बीच की दूरी 2 mm से अधिक नहीं होनी चाहिए, ताकि टूल बीच में फंसकर दुर्घटना न हो जाए।
  3. एंगल का ध्यान: जिस टूल की धार तेज़ करनी है (जैसे ड्रिल का $118^\circ$ कोण), उसे उसी सही एंगल पर व्हील के संपर्क में लाएं।
  4. हल्का दबाव: टूल को व्हील पर बहुत ज़ोर से न दबाएं। इससे टूल जल सकता है (उसकी हार्डनेस खत्म हो सकती है)।
  5. कूलिंग (Dipping): ग्राइंडिंग के दौरान टूल गर्म हो जाता है। इसे बार-बार पानी में डुबोकर ठंडा करते रहें ताकि इसकी ‘टेम्परिंग’ खराब न हो।

4. व्हील की ड्रेसिंग और ट्रूइंग (Dressing & Truing)

लगातार उपयोग के बाद ग्राइंडिंग व्हील खराब हो जाता है, जिसे ठीक करने के लिए दो प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं:

  • Loading (लोडिंग): जब धातु के बारीक कण व्हील के छिद्रों में फंस जाते हैं, तो उसे लोडिंग कहते हैं।
  • Glazing (ग्लेज़िंग): जब व्हील के दाने घिसकर चिकने हो जाते हैं और काटना बंद कर देते हैं, तो उसे ग्लेज़िंग कहते हैं।
  • Dressing (ड्रेसिंग): ‘व्हील ड्रेसर’ टूल की मदद से लोड हुए कणों को हटाना और नए नुकीले दाने बाहर निकालना ड्रेसिंग कहलाता है।
  • Truing (ट्रूइंग): व्हील को दोबारा पूरी तरह गोल (Concentric) बनाने की प्रक्रिया को ट्रूइंग कहते हैं।

5. ग्राइंडिंग के दौरान सुरक्षा सावधानियाँ (Crucial Safety Rules)

ग्राइंडिंग मशीन वर्कशॉप की सबसे खतरनाक मशीनों में से एक हो सकती है यदि सावधानी न बरती जाए:

  1. गॉगल्स (Safety Goggles): ग्राइंडिंग करते समय आंखों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। चिंगारियां और बारीक कण आंखों को स्थायी नुकसान पहुँचा सकते हैं।
  2. व्हील गार्ड: हमेशा व्हील गार्ड लगे होने पर ही मशीन चलाएं।
  3. खड़े होने की स्थिति: कभी भी व्हील के बिल्कुल सामने खड़े होकर ग्राइंडिंग न करें, हमेशा थोड़ा साइड में खड़े हों। यदि व्हील टूटता है, तो वह सामने की ओर ही फेंका जाता है।
  4. दस्ताने पहनें: घूमते हुए व्हील के पास दस्ताने पहनना खतरनाक है, क्योंकि वे व्हील और टूल रेस्ट के बीच फंस सकते हैं।
  5. ध्वनि की जांच (Ring Test): नए व्हील को लगाने से पहले उसे हल्के से ठोककर देखें; यदि साफ ‘टिंग’ की आवाज़ आए तो व्हील सही है, ‘डेड’ आवाज़ आए तो मतलब व्हील अंदर से टूटा है।

6. ग्राइंडिंग व्हील की मार्किंग का अर्थ (Example Marking)

व्हील पर कुछ कोड लिखे होते हैं, जैसे: 51 A 46 L 5 V 23

  • A: एब्रेसिव का प्रकार (Aluminium Oxide)
  • 46: ग्रेन साइज (Medium)
  • L: ग्रेड (Medium Hard)
  • V: बॉन्ड का प्रकार (Vitrified)

निष्कर्ष

ग्राइंडिंग मशीन केवल धातु काटने का औजार नहीं है, बल्कि यह टूल्स को नया जीवन देने वाली मशीन है। एक कुशल मैकेनिक वही है जो व्हील की आवाज़ और चिंगारियों के रंग से समझ जाए कि ग्राइंडिंग सही हो रही है या नहीं। सही ड्रेसिंग और सुरक्षा चश्मे का उपयोग आपकी कार्यकुशलता और सुरक्षा दोनों को सुनिश्चित करता है।

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