फेरस और नॉन-फेरस धातु (Ferrous and Non-Ferrous Metals): अंतर, गुण और उपयोग

Ferrous and Non-Ferrous metals

भूमिका: धातु विज्ञान (Metallurgy) का परिचय

मैकेनिकल इंजीनियरिंग और वर्कशॉप टेक्नोलॉजी में ‘मटेरियल साइंस’ की बहुत अहमियत है। जब भी हम कोई मशीन, पुर्जा या औजार बनाते हैं, तो सबसे पहले हमें यह तय करना होता है कि वह किस धातु (Metal) का बनेगा। ब्रह्मांड में मौजूद सभी धातुओं को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है: फेरस (Ferrous) और नॉनफेरस (Non-Ferrous)

इन दोनों के बीच का सबसे बुनियादी अंतर ‘लोहा’ (Iron) है। जिस धातु में लोहा मुख्य तत्व के रूप में मौजूद होता है, वह फेरस है और जिसमें लोहा नहीं होता, वह नॉन-फेरस है। आइए इन दोनों को गहराई से समझते हैं।


1. फेरस धातु (Ferrous Metals)

‘फेरस’ शब्द लैटिन शब्द ‘Ferrum’ से आया है, जिसका अर्थ है लोहा। फेरस धातुओं में लोहे की मात्रा सबसे अधिक होती है और इसमें कार्बन व अन्य तत्व मिलाए जाते हैं।

फेरस धातुओं के मुख्य गुण:

  • चुंबकीय गुण: ये धातुएं चुंबक की ओर आकर्षित होती हैं।
  • मज़बूती: इनकी टेंसाइल स्ट्रेंथ (Tensile Strength) बहुत अधिक होती है, जिसके कारण इनका उपयोग निर्माण कार्यों में होता है।
  • जंग (Corrosion): लोहे की उपस्थिति के कारण इनमें जंग लगने की संभावना बहुत अधिक होती है (स्टेनलेस स्टील को छोड़कर)।
  • वजन: ये धातुएं आमतौर पर भारी होती हैं।

प्रमुख उदाहरण और उपयोग:

  1. पिग आयरन (Pig Iron): यह लोहे का सबसे कच्चा रूप है।
  2. कास्ट आयरन (Cast Iron): इसमें 2% से 4% कार्बन होता है। इसका उपयोग मशीन की बॉडी और भारी बेड बनाने में होता है क्योंकि यह झटकों को सोख सकता है।
  3. रॉट आयरन (Wrought Iron): यह लोहे का सबसे शुद्ध रूप है। इसका उपयोग जंजीरें और कृषि उपकरण बनाने में होता है।
  4. स्टील (Steel): लोहे और कार्बन का मिश्रण। इसका उपयोग सुई से लेकर हवाई जहाज तक बनाने में होता है।
    • लो कार्बन स्टील (Mild Steel): पाइप, तार और चादरें बनाने में।
    • हाई कार्बन स्टील: छेनी, रेती और ड्रिल बिट बनाने में।

2. नॉनफेरस धातु (Non-Ferrous Metals)

वे धातुएं जिनमें लोहा बिल्कुल नहीं होता या नगण्य मात्रा में होता है, उन्हें नॉन-फेरस धातु कहा जाता है। ये धातुएं अपनी विशेष चमक, कम वजन और जंग-रोधी गुणों के लिए जानी जाती हैं।

नॉनफेरस धातुओं के मुख्य गुण:

  • जंगरोधी (Corrosion Resistance): इनमें लोहा नहीं होता, इसलिए इनमें प्राकृतिक रूप से जंग नहीं लगता।
  • हल्का वजन: ये फेरस धातुओं की तुलना में काफी हल्की होती हैं (जैसे एल्युमीनियम)।
  • चालकता (Conductivity): ये बिजली और ऊष्मा (Heat) की बहुत अच्छी सुचालक होती हैं।
  • गैरचुंबकीय: ये चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होतीं।

प्रमुख उदाहरण और उपयोग:

  1. एल्युमीनियम (Aluminium): हल्का और मज़बूत। उपयोग: हवाई जहाज के पुर्जे, रसोई के बर्तन और बिजली के तार।
  2. तांबा (Copper): बिजली का बेहतरीन सुचालक। उपयोग: मोटर वाइंडिंग, इलेक्ट्रिक वायर और रेडिएटर पाइप।
  3. पीतल (Brass): तांबा और जस्ता (Zinc) का मिश्रण। उपयोग: सजावटी सामान, वाल्व और संगीत वाद्ययंत्र।
  4. कांसा (Bronze): तांबा और टिन का मिश्रण। उपयोग: मूर्तियाँ, सिक्के और बियरिंग्स।
  5. सीसा (Lead): भारी लेकिन नरम। उपयोग: बैटरियों और एक्स-रे रूम की शील्डिंग में।

3. फेरस और नॉनफेरस धातुओं में मुख्य अंतर

विशेषताफेरस धातु (Ferrous)नॉनफेरस धातु (Non-Ferrous)
लोहा (Iron)मुख्य तत्व लोहा होता है।लोहा नहीं होता है।
जंग (Rust)नमी में जल्दी जंग लगता है।जंग नहीं लगता (Corrosion resistant)।
चुंबकत्वये चुंबकीय होती हैं।ये गैर-चुंबकीय होती हैं।
वजनभारी होती हैं।हल्की होती हैं।
कीमतआमतौर पर सस्ती होती हैं।तुलनात्मक रूप से महंगी होती हैं।
उदाहरणस्टील, कास्ट आयरन।एल्युमीनियम, तांबा, सोना।

4. मिश्र धातु (Alloys): गुणों को बेहतर बनाना

आजकल शुद्ध धातुओं के बजाय मिश्र धातुओं (Alloys) का उपयोग अधिक होता है। दो या दो से अधिक धातुओं को मिलाकर जो नया पदार्थ बनता है, उसे मिश्र धातु कहते हैं।

  • फेरस अलॉय: जैसे स्टेनलेस स्टील (लोहा + क्रोमियम + निकल)। इसमें लोहा होने के बावजूद जंग नहीं लगता।
  • नॉनफेरस अलॉय: जैसे पीतल और कांसा।

5. वर्कशॉप में धातुओं की पहचान कैसे करें?

एक कुशल मैकेनिक धातु को देखकर या कुछ सरल टेस्ट से पहचान सकता है:

  1. चुंबक टेस्ट: यदि चुंबक चिपक जाए, तो वह फेरस धातु है।
  2. स्पार्क टेस्ट: ग्राइंडिंग व्हील पर धातु को रगड़ने से निकलने वाली चिंगारियों (Sparks) के रंग और आकार से स्टील के प्रकार का पता चलता है।
  3. रंग: तांबा लाल-भूरा, पीतल पीला और एल्युमीनियम सफेद-चांदी जैसा दिखता है।
  4. वजन: भारीपन से लोहे और हल्केपन से एल्युमीनियम की पहचान होती है।

निष्कर्ष

धातु विज्ञान का ज्ञान वर्कशॉप की सफलता की पहली सीढ़ी है। जहाँ हमें मज़बूती और कम लागत चाहिए, वहाँ हम फेरस धातुओं (जैसे स्टील) का उपयोग करते हैं। वहीं जहाँ हमें जंग से बचाव और हल्का वजन चाहिए (जैसे विमान या इलेक्ट्रॉनिक्स), वहाँ नॉन-फेरस धातुएं अनिवार्य हैं। आईटीआई और मैकेनिकल छात्रों के लिए इन गुणों को समझना बहुत ज़रूरी है ताकि वे सही काम के लिए सही धातु चुन सकें।

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