इंजीनियरिंग ड्राइंग (Engineering Drawing): लाइन्स, सिम्बल्स और प्रोजेक्शन की पूरी जानकारी

Engineering Drawing

भूमिका: इंजीनियरिंग ड्राइंग क्या है?

इंजिनियरिंग ड्राइंग को इंजीनियरों की भाषा” (Language of Engineers) कहा जाता है। जिस तरह हम अपनी बात कहने के लिए शब्दों का उपयोग करते हैं, उसी तरह एक डिज़ाइनर अपने विचारों को कारीगर तक पहुँचाने के लिए ड्राइंग का उपयोग करता है। इसमें लाइन्स, सिम्बल्स और प्रोजेक्शन का सही ज्ञान होना अनिवार्य है।


1. लाइन्स के प्रकार (Types of Lines)

ड्राइंग में हर लाइन का अपना एक खास मतलब होता है। इन्हें ‘Alphabet of Lines’ भी कहते हैं:

  • Object Line (वस्तु रेखा): यह मोटी और ठोस (Continuous thick) होती है। इसका उपयोग वस्तु के बाहरी किनारों को दिखाने के लिए किया जाता है।
  • Hidden Line (छिपी हुई रेखा): यह छोटी कटी हुई लाइनों (Dashed lines) से बनी होती है। यह उन किनारों को दर्शाती है जो सामने से दिखाई नहीं दे रहे।
  • Center Line (केंद्र रेखा): यह एक लंबी और एक छोटी लाइन (Long and short dash) से बनती है। यह किसी छेद या बेलनाकार वस्तु के केंद्र को दर्शाती है।
  • Dimension Line (विस्तार रेखा): यह पतली होती है और इसके दोनों सिरों पर तीर (Arrows) होते हैं, जो वस्तु की लंबाई या चौड़ाई बताते हैं।
  • Construction Line: यह बहुत पतली और हल्की होती है, जिसका उपयोग शुरुआती खाका खींचने के लिए किया जाता है।

2. इंजीनियरिंग सिम्बल्स (Drawing Symbols)

ड्राइंग को साफ-सुथरा रखने के लिए शब्दों की जगह चिन्हों का उपयोग किया जाता है:

  • Diameter (व्यास): $\varnothing$
  • Radius (त्रिज्या): $R$
  • Square (वर्ग): $\Box$
  • Counterbore: $\sqcup$
  • Countersink: $\vee$
  • Degree: $^\circ$

3. प्रोजेक्शन (Projections)

प्रोजेक्शन का मतलब है किसी $3D$ वस्तु को $2D$ पेपर पर दिखाना। इसके लिए Orthographic Projection का उपयोग होता है, जिसमें मुख्य रूप से दो विधियां हैं:

A. प्रथम कोण प्रोजेक्शन (First Angle Projection)

यह विधि मुख्य रूप से भारत और यूरोप में उपयोग की जाती है।

  • इसमें वस्तु को पहले चतुर्थांश (1st Quadrant) में माना जाता है।
  • नियम: प्रेक्षक (Observer) और प्लेन के बीच में वस्तु होती है।
  • पोजीशन: फ्रंट व्यू (Front View) ऊपर होता है और टॉप व्यू (Top View) उसके नीचे बनता है। लेफ्ट साइड व्यू राइट की ओर बनता है।

B. तृतीय कोण प्रोजेक्शन (Third Angle Projection)

यह विधि अमेरिका और कनाडा में अधिक प्रचलित है।

  • इसमें वस्तु को तीसरे चतुर्थांश (3rd Quadrant) में माना जाता है।
  • नियम: वस्तु और प्रेक्षक के बीच में प्लेन (Transparent plane) होता है।
  • पोजीशन: टॉप व्यू ऊपर होता है और फ्रंट व्यू उसके नीचे। लेफ्ट साइड व्यू लेफ्ट की ओर ही बनता है। यह ज्यादा सरल मानी जाती है क्योंकि इसमें व्यू उसी दिशा में बनते हैं जहाँ से देखे जाते हैं।

4. मुख्य अंतर: 1st Angle vs 3rd Angle

विशेषताFirst Angle ProjectionThird Angle Projection
सिंबल (Symbol)छोटा सिरा पहले आता है (बाएं)बड़ा सिरा पहले आता है (बाएं)
क्रमTop View, Front View के नीचेTop View, Front View के ऊपर
प्लेनअपारदर्शी (Opaque)पारदर्शी (Transparent)
उपयोगभारत और यूरोपअमेरिका और अन्य देश

5. ड्राइंग शीट का लेआउट (Sheet Layout)

एक अच्छी इंजीनियरिंग ड्राइंग में निम्नलिखित चीजें ज़रूर होनी चाहिए:

  1. Border Lines: शीट के चारों ओर जगह छोड़ना।
  2. Title Block: इसमें ड्राइंग का नाम, स्केल, प्रोजेक्शन का सिंबल, और बनाने वाले का नाम होता है।
  3. Scale: $1:1$ (असली साइज), $1:2$ (छोटा साइज), $2:1$ (बड़ा साइज)।

निष्कर्ष

इंजीनियरिंग ड्राइंग केवल चित्रकारी नहीं है, बल्कि एक सटीक गणितीय प्रस्तुति है। यदि आप प्रोजेक्शन के सिम्बल्स को गलत पढ़ते हैं, तो पूरी मशीन के पुर्जे उल्टे बन सकते हैं। इसलिए, फर्स्ट और थर्ड एंगल प्रोजेक्शन के अंतर को समझना एक ड्राफ्ट्समैन या मशीनिस्ट के लिए सबसे बड़ी नींव है

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