
भूमिका: वेल्डिंग क्या है?
वेल्डिंग (Welding) दो या दो से अधिक धातु के टुकड़ों को ऊष्मा (Heat) या दबाव (Pressure) की मदद से स्थायी रूप से जोड़ने की एक प्रक्रिया है। मैकेनिकल वर्कशॉप में वेल्डिंग का उपयोग पुलों, जहाजों, ऑटोमोबाइल और मशीनों के ढांचे बनाने के लिए किया जाता है।
वर्कशॉप में मुख्य रूप से दो प्रकार की वेल्डिंग का उपयोग सबसे अधिक होता है: आर्क वेल्डिंग (Arc Welding) और गैस वेल्डिंग (Gas Welding)।
1. आर्क वेल्डिंग (Electric Arc Welding)
आर्क वेल्डिंग में बिजली (Electric current) का उपयोग करके धातु को पिघलाया जाता है। इसमें इलेक्ट्रोड और वर्कपीस के बीच एक शक्तिशाली स्पार्क पैदा होता है जिसे ‘आर्क’ कहते हैं। इस आर्क का तापमान लगभग 3500°C से 4000°C तक होता है।
मुख्य उपकरण:
- Welding Machine: जो AC या DC करंट की सप्लाई देती है।
- Electrode Holder: इलेक्ट्रोड को पकड़ने के लिए।
- Earth Clamp: सर्किट पूरा करने के लिए इसे वर्कपीस से जोड़ा जाता है।
- Welding Cables: करंट ले जाने के लिए।
- Electrode (इलेक्ट्रोड): यह एक धातु की छड़ होती है जिस पर ‘फ्लक्स’ (Flux) की परत चढ़ी होती है। यह पिघलकर जोड़ को भरता है।
प्रक्रिया:
जब इलेक्ट्रोड को वर्कपीस के पास लाया जाता है, तो हवा के माध्यम से बिजली प्रवाहित होती है और आर्क पैदा होता है। यह गर्मी धातु और इलेक्ट्रोड को पिघला देती है, जिससे एक ‘वेल्ड पूल’ (Weld Pool) बनता है। ठंडा होने पर यह एक मजबूत जोड़ बन जाता है।
2. गैस वेल्डिंग (Oxy-Acetylene Welding)
गैस वेल्डिंग में ऑक्सीजन और एक ज्वलनशील गैस (आमतौर पर एसिटिलीन) के मिश्रण को जलाकर लौ (Flame) पैदा की जाती है। इस लौ की गर्मी से धातु को पिघलाया जाता है।
मुख्य उपकरण:
- Oxygen Cylinder (काला रंग): इसमें उच्च दबाव पर ऑक्सीजन भरी होती है।
- Acetylene Cylinder (मैरून रंग): इसमें एसिटिलीन गैस होती है।
- Regulators: गैस के दबाव को नियंत्रित करने के लिए।
- Welding Torch: जहाँ दोनों गैसें मिलती हैं और जलती हैं।
- Filler Rod: जोड़ को भरने के लिए अलग से इस्तेमाल होने वाली धातु की छड़।
गैस वेल्डिंग की लपटें (Flames):
- Neutral Flame: ऑक्सीजन और एसिटिलीन बराबर मात्रा में। (सामान्य वेल्डिंग के लिए)।
- Oxidizing Flame: ऑक्सीजन की मात्रा अधिक। (पीतल की वेल्डिंग के लिए)।
- Carburizing Flame: एसिटिलीन की मात्रा अधिक। (हार्ड फेसिंग के लिए)।
3. आर्क और गैस वेल्डिंग के बीच मुख्य अंतर
| विशेषता | आर्क वेल्डिंग | गैस वेल्डिंग |
| ऊर्जा का स्रोत | बिजली (Electricity) | गैसों का मिश्रण (Fuel Gas) |
| तापमान | बहुत अधिक (3500°C+) | कम (3200°C के आसपास) |
| उपयोग | भारी और मोटी धातुओं के लिए | पतली चादरों और मरम्मत के लिए |
| लागत | कम समय और अधिक उत्पादन | अधिक समय और महंगी गैसें |
| पोर्टेबिलिटी | भारी मशीन की ज़रूरत | सिलेंडरों के साथ ले जाना आसान |
4. वेल्डिंग जॉइंट्स के प्रकार (Types of Welding Joints)
वेल्डिंग करते समय धातुओं को अलग-अलग स्थितियों में रखा जाता है:
- Butt Joint: दो टुकड़ों को आमने-सामने रखकर।
- Lap Joint: एक-दूसरे के ऊपर चढ़ाकर।
- T-Joint: ‘T’ के आकार में जोड़ना।
- Corner Joint: किनारों को 90° पर जोड़ना।
5. वेल्डिंग सुरक्षा (Welding Safety Precautions)
वेल्डिंग एक खतरनाक प्रक्रिया है, इसलिए पीपीई (PPE) का उपयोग अनिवार्य है:
- Welding Helmet/Shield: आर्क की तेज रोशनी (Ultra-violet rays) से आँखों को बचाने के लिए। इससे ‘Arc Eye’ की बीमारी हो सकती है।
- Leather Apron & Gloves: उड़ती हुई चिंगारियों और गर्म धातु से बचने के लिए।
- Ventilation: वेल्डिंग के धुएं से बचने के लिए कार्यक्षेत्र हवादार होना चाहिए।
- Cylinder Safety: गैस सिलेंडरों को हमेशा सीधा रखें और उन्हें जंजीर से बांधकर रखें। कभी भी तेल लगे हाथों से ऑक्सीजन रेगुलेटर को न छुएं (विस्फोट का खतरा)।
निष्कर्ष
जहाँ आर्क वेल्डिंग अपनी मज़बूती और रफ्तार के लिए जानी जाती है, वहीं गैस वेल्डिंग अपनी बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) के कारण वर्कशॉप का अहम हिस्सा है। एक कुशल वेल्डर को दोनों तकनीकों का ज्ञान होना चाहिए ताकि वह धातु की मोटाई और काम की ज़रूरत के हिसाब से सही विधि चुन सके।
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