
भूमिका: मैकेनिकल वर्कशॉप में ताप का महत्व
धातुओं के साथ काम करते समय ऊष्मा (Heat) और तापमान (Temperature) सबसे महत्वपूर्ण कारक होते हैं। जब हम धातु को काटते (Milling/Turning) हैं, तो घर्षण के कारण गर्मी पैदा होती है। यदि इस गर्मी को नियंत्रित न किया जाए, तो टूल खराब हो सकता है और जॉब का साइज बिगड़ सकता है।
1. ऊष्मा और तापमान में अंतर (Heat vs. Temperature)
अक्सर लोग इन्हें एक ही समझते हैं, लेकिन इनमें गहरा वैज्ञानिक अंतर है:
| विशेषता | ऊष्मा (Heat) | तापमान (Temperature) |
| परिभाषा | यह ऊर्जा का एक रूप है जो अणुओं की गति के कारण होता है। | यह वस्तु के ठंडे या गर्म होने की डिग्री (माप) है। |
| मापन | इसे कुल ऊर्जा के रूप में मापा जाता है। | इसे ऊर्जा की तीव्रता के रूप में मापा जाता है। |
| इकाई (Unit) | जूल (Joule) या कैलोरी (Calorie) | सेल्सियस ($^\circ$C), फारेनहाइट ($^\circ$F), केल्विन (K) |
| उपकरण | कैलोरीमीटर (Calorimeter) | थर्मामीटर (Thermometer) या पाइरोमीटर |
2. तापमान के पैमाने (Temperature Scales)
इंजीनियरिंग में तापमान को मापने के लिए मुख्य रूप से तीन पैमानों का उपयोग होता है:
- Celsius ($^\circ$C): पानी $0^\circ$C पर जमता है और $100^\circ$C पर उबलता है।
- Fahrenheit ($^\circ$F): पानी $32^\circ$F पर जमता है और $212^\circ$F पर उबलता है।
- Kelvin (K): इसे ‘परम शून्य’ (Absolute Zero) पैमाना कहते हैं। $0$ K = $-273.15^\circ$C।
रूपांतरण सूत्र (Conversion Formula):
$$\frac{C}{5} = \frac{F – 32}{9}$$
3. ऊष्मा संचरण की विधियाँ (Transmission of Heat)
ऊष्मा हमेशा गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर बहती है। इसके तीन तरीके हैं:
- चालन (Conduction): ठोस पदार्थों में ऊष्मा एक कण से दूसरे कण में जाती है। (जैसे: लोहे की रॉड का एक सिरा गर्म करने पर दूसरा अपने आप गर्म हो जाना)।
- संवहन (Convection): तरल (Liquids) और गैसों में ऊष्मा का संचार। (जैसे: पानी का उबलना)।
- विकिरण (Radiation): बिना किसी माध्यम के ऊष्मा का पहुँचना। (जैसे: सूरज की गर्मी या गर्म लोहे से निकलने वाली आंच)।
4. धातुओं पर ऊष्मा का प्रभाव (Expansion and Contraction)
मशीनिस्ट के लिए यह समझना सबसे ज़रूरी है। लगभग सभी धातुएं गर्म होने पर फैलती हैं (Expansion) और ठंडी होने पर सिकुड़ती हैं (Contraction)।
- Linear Expansion: लंबाई में बढ़ाव।
- Application: रेल की पटरियों के बीच गैप छोड़ा जाता है ताकि गर्मियों में फैलने पर पटरी टेढ़ी न हो। वर्कशॉप में, ‘श्रिंक फिटिंग’ (Shrink Fitting) के लिए पुर्जे को गर्म करके फैलाया जाता है और फिर फिट किया जाता है।
5. विशिष्ट ऊष्मा और लेटेंट हीट (Specific & Latent Heat)
- Specific Heat (विशिष्ट ऊष्मा): किसी पदार्थ के $1$ ग्राम का तापमान $1^\circ$C बढ़ाने के लिए जितनी ऊष्मा चाहिए। (पानी की विशिष्ट ऊष्मा सबसे अधिक होती है, इसीलिए इसे Coolant के रूप में इस्तेमाल किया जाता है)।
- Latent Heat (गुप्त ऊष्मा): वह ऊष्मा जो पदार्थ की अवस्था बदलती है (जैसे बर्फ से पानी बनना) लेकिन तापमान नहीं बढ़ाती।
6. वर्कशॉप में उपयोग (Practical Use)
- Heat Treatment: धातु को एक निश्चित तापमान तक गर्म करके उसे ‘Hard’ या ‘Soft’ करना।
- Coolants: कटिंग के दौरान निकलने वाली ऊष्मा को सोखने के लिए कूलेंट का उपयोग करना ताकि टूल की ‘Hardness’ बनी रहे।
- Welding: ऊष्मा का उपयोग करके धातुओं को पिघलाकर जोड़ना।
निष्कर्ष
तापमान का सही ज्ञान न केवल धातुओं के व्यवहार को समझने में मदद करता है, बल्कि मशीनों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। एक कुशल कारीगर वही है जो ‘Thermal Expansion’ को ध्यान में रखकर जॉब की सटीक माप ले।
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