
भूमिका: जिग्स और फिक्सचर्स की आवश्यकता क्यों?
औद्योगिक उत्पादन (Mass Production) में जब हमें एक ही डिजाइन के हजारों पुर्जे बनाने होते हैं, तो हर बार ‘मार्किंग’ करना और ‘टूल सेट’ करना बहुत कठिन और समय लेने वाला काम होता है। इस समस्या को हल करने के लिए जिग्स और फिक्सचर्स का उपयोग किया जाता है। ये ऐसे उपकरण हैं जो बिना मार्किंग के पुर्जों को सटीक तरीके से बनाने में मदद करते हैं।
1. जिग (Jig) क्या है?
जिग एक विशेष उपकरण है जो वर्कपीस को मजबूती से पकड़ता (Hold) है, उसे सही स्थिति में लोकेट (Locate) करता है और साथ ही कटिंग टूल (जैसे ड्रिल) को मार्गदर्शन (Guide) भी प्रदान करता है।
- मुख्य विशेषता: इसमें ‘ड्रिल बुश’ (Drill Bush) लगे होते हैं जो टूल को सही जगह पर केंद्रित रखते हैं।
- उपयोग: इसका उपयोग मुख्य रूप से ड्रिलिंग, रीमिंग, टैपिंग और काउंटर-सिंकिंग जैसे कार्यों में होता है।
- वजन: ये अक्सर हल्के होते हैं ताकि इन्हें आसानी से घुमाया जा सके।
2. फिक्सचर (Fixture) क्या है?
फिक्सचर वह उपकरण है जो वर्कपीस को केवल मजबूती से पकड़ने (Hold) और लोकेट (Locate) करने का कार्य करता है। यह जिग की तरह कटिंग टूल को गाइड नहीं करता।
- मुख्य विशेषता: फिक्सचर को मशीन की टेबल पर नट-बोल्ट की सहायता से मजबूती से स्थिर (Clamp) किया जाता है।
- उपयोग: इसका उपयोग मिलिंग, टर्निंग, ग्राइंडिंग, प्लानिंग और वेल्डिंग जैसे भारी कार्यों में होता है।
- वजन: ये काफी भारी और मजबूत होते हैं ताकि कटिंग फोर्स को झेल सकें।
3. जिग और फिक्सचर के बीच मुख्य अंतर (Differences)
| विशेषता | जिग (Jig) | फिक्सचर (Fixture) |
| कार्य | टूल को पकड़ता भी है और गाइड भी करता है। | केवल टूल को पकड़ता और लोकेट करता है। |
| गाइडिंग | इसमें बुश का उपयोग होता है। | इसमें कोई गाइडिंग डिवाइस नहीं होता। |
| वजन | यह हल्का होता है। | यह भारी और मजबूत होता है। |
| मशीन अटैचमेंट | इसे अक्सर पकड़ने की ज़रूरत नहीं होती। | इसे मशीन टेबल पर क्लैंप करना ज़रूरी है। |
| लागत | तुलनात्मक रूप से महंगा होता है। | जिग के मुकाबले कम खर्चीला होता है। |
4. जिग्स और फिक्सचर्स के लाभ (Benefits)
- मार्किंग की ज़रूरत नहीं: हर जॉब पर बार-बार मार्किंग करने का समय बचता है।
- सटीकता (Accuracy): मानवीय त्रुटि (Human Error) कम हो जाती है और सभी पुर्जे एक जैसे बनते हैं।
- कुशलता: कम कुशल कारीगर (Unskilled worker) भी बहुत सटीकता से काम कर सकता है।
- उत्पादन में वृद्धि: पुर्जों को जल्दी से सेट और रिमूव किया जा सकता है, जिससे समय की बचत होती है।
- लागत में कमी: कम समय में ज्यादा उत्पादन होने से प्रति यूनिट लागत घट जाती है।
5. जिग्स के प्रकार (Types of Jigs)
- Template Jig: सबसे सरल प्रकार, जिसे जॉब के ऊपर रखकर छेद किए जाते हैं।
- Plate Jig: टेम्पलेट जिग का सुधरा हुआ रूप जिसमें बुश लगे होते हैं।
- Channel Jig: इसका आकार ‘C’ जैसा होता है, जो जॉब को तीन तरफ से घेरता है।
- Box Jig: यह बॉक्स जैसा होता है जिसमें जॉब को अंदर रखकर अलग-अलग दिशाओं से ड्रिलिंग की जा सकती है।
6. फिक्सचर्स के प्रकार (Types of Fixtures)
- Milling Fixture: मिलिंग मशीन पर भारी कटिंग के लिए।
- Turning Fixture: लेथ मशीन के चक पर अनियमित आकार के जॉब पकड़ने के लिए।
- Welding Fixture: वेल्डिंग के दौरान पुर्जों को सही एंगल पर जोड़ने के लिए।
निष्कर्ष
जिग्स और फिक्सचर्स मास प्रोडक्शन की रीढ़ हैं। एक मशीनिस्ट या फिटर के लिए यह समझना जरूरी है कि कब जिग का उपयोग करना है और कब फिक्सचर का। सीधे शब्दों में कहें तो— अगर टूल को रास्ता दिखाना है तो ‘जिग’ लाओ, और अगर सिर्फ भारी जॉब को जकड़ना है तो ‘फिक्सचर’ का इस्तेमाल करो।
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