मिलिंग और शेपिंग मशीन (Milling & Shaping Machines): मशीनिस्ट ट्रेड के लिए विस्तृत गाइड

milling and shaping machines

भूमिका: मिलिंग और शेपिंग मशीनों का महत्व

मशीनिस्ट ट्रेड में मिलिंग (Milling) और शेपिंग (Shaping) दो ऐसी प्रक्रियाएं हैं जो किसी भी वर्कशॉप की रीढ़ मानी जाती हैं। जहाँ लेथ मशीन मुख्य रूप से गोल (Cylindrical) जॉब के लिए है, वहीं मिलिंग और शेपिंग मशीनों का उपयोग फ्लैट सतहों, गियर्स, स्लॉट्स और जटिल प्रोफाइल बनाने के लिए किया जाता है।

एक मशीनिस्ट के लिए इन दोनों मशीनों के बीच का अंतर और उनके संचालन की तकनीक को समझना करियर की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।


1. मिलिंग मशीन (Milling Machine)

मिलिंग मशीन एक मल्टीपॉइंट कटिंग मशीन है। इसमें कटिंग टूल (जिसे मिलिंग कटर कहते हैं) अपनी धुरी पर घूमता है, जबकि वर्कपीस को टेबल की मदद से टूल की ओर फीड किया जाता है।

मुख्य भाग (Main Parts):

  • Column and Base: मशीन का मुख्य ढांचा जो भारी कास्ट आयरन का बना होता है।
  • Spindle: यह वह शाफ्ट है जो कटर को घुमाता है।
  • Arbor: हॉरिजॉन्टल मिलिंग में कटर को पकड़ने वाली छड़।
  • Knee: यह कॉलम पर ऊपर-नीचे सरकता है और पूरी टेबल को सपोर्ट देता है।
  • Table: इस पर जॉब को वाइस (Vice) की मदद से पकड़ा जाता है।

मिलिंग के मुख्य ऑपरेशन्स:

  1. Plain Milling: समतल सतह बनाना।
  2. Face Milling: वर्कपीस के चेहरे (Face) को फिनिश करना।
  3. Slot Milling: चाबी के खांचे (Keyways) या टी-स्लॉट (T-Slots) बनाना।
  4. Gear Cutting: ‘इंडेक्सिंग हेड’ (Indexing Head) की मदद से सटीक गियर्स काटना।

Up Milling vs Down Milling:

  • Up Milling: इसमें कटर जॉब की फीड के विपरीत दिशा में घूमता है (चिप्स नीचे से ऊपर की ओर कटते हैं)।
  • Down Milling (Climb Milling): इसमें कटर जॉब की फीड की दिशा में ही घूमता है। इसमें सरफेस फिनिश बेहतर आती है।

2. शेपिंग मशीन (Shaping Machine/Shaper)

शेपर एक सिंगलपॉइंट कटिंग मशीन है (जैसे लेथ टूल)। इसमें टूल आगे-पीछे (Reciprocating motion) चलता है, जबकि जॉब स्थिर रहता है।

मुख्य भाग (Main Parts):

  • Ram: यह मशीन का वह हिस्सा है जो आगे-पीछे चलता है और जिसके आगे टूल हेड लगा होता है।
  • Tool Head: इसमें कटिंग टूल को पकड़ा जाता है। इसे किसी भी कोण पर घुमाया जा सकता है।
  • Clapper Box: यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वापसी के स्ट्रोक (Return stroke) के दौरान टूल को ऊपर उठा देता है ताकि टूल खराब न हो।
  • Table: इस पर जॉब को बांधा जाता है।

क्विक रिटर्न मैकेनिज्म (Quick Return Mechanism):

शेपिंग मशीन में टूल केवल आगे जाते समय काटता है (Cutting Stroke)। वापस आते समय (Return Stroke) वह कोई काम नहीं करता। समय बचाने के लिए शेपर में ऐसी व्यवस्था होती है कि वापसी का स्ट्रोक बहुत तेजी से पूरा होता है। इसे ही क्विक रिटर्न मैकेनिज्म’ कहते हैं।


3. मिलिंग और शेपिंग मशीन में अंतर (Difference)

विशेषतामिलिंग मशीन (Milling)शेपिंग मशीन (Shaper)
कटिंग टूलमल्टी-पॉइंट कटर (HSS/Carbide)सिंगल-पॉइंट टूल
टूल की गतिरोटरी (घूमना)रेसिप्रोकेटिंग (आगे-पीछे)
उत्पादन (Output)बहुत तेज (Mass Production)धीमी (Single job work)
जटिलतागियर और प्रोफाइल बना सकती हैकेवल फ्लैट और सीधे स्लॉट्स
लागतमहंगी मशीन और टूल्ससस्ती और सरल मशीन

4. मशीनिस्ट के लिए विशेष ऑपरेशन्स

इंडेक्सिंग (Indexing):

मिलिंग मशीन पर गियर बनाने के लिए जॉब को बराबर भागों में घुमाना पड़ता है। इसे इंडेक्सिंग हेड या डिवाइडेड हेड की मदद से किया जाता है। एक मशीनिस्ट को ‘Simple’ और ‘Differential’ इंडेक्सिंग की गणना आनी चाहिए।

स्लॉटिंग (Slotting):

शेपर के समान ही एक मशीन होती है स्लॉटर’। इसमें रैम क्षैतिज (Horizontal) के बजाय लंबवत (Vertical) चलती है। इसका उपयोग इंटरनल गियर्स या की-वेज काटने के लिए होता है।


5. सुरक्षा और रखरखाव (Safety Tips)

  1. Backlash: मिलिंग करते समय टेबल के लीड स्क्रू में ‘बैकलैश’ नहीं होना चाहिए, वरना कटर टूट सकता है।
  2. Stroke Length: शेपर चलाते समय रैम की स्ट्रोक लंबाई जॉब से थोड़ी ही ज्यादा रखें (आगे 1/2″ और पीछे 1/4″)।
  3. Clamping: मिलिंग में कटर बहुत बल लगाता है, इसलिए जॉब को बहुत मजबूती से क्लैंप करें।
  4. Distance: शेपर के सामने कभी खड़े न हों, क्योंकि रैम बाहर की तरफ निकलती है।

निष्कर्ष

जहाँ शेपिंग मशीन साधारण फ्लैट सतहों और छोटे वर्कशॉप के लिए बेहतरीन है, वहीं मिलिंग मशीन आधुनिक उत्पादन की जान है। मशीनिस्ट ट्रेड में महारत हासिल करने के लिए इन दोनों मशीनों के फीड, स्पीड और डेप्थ ऑफ़ कट (Depth of Cut) के तालमेल को समझना अनिवार्य है।

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