ड्रिलिंग मशीन (Drilling Machine): प्रकार, प्रक्रिया और ड्रिल बिट्स की पूरी जानकारी

Drilling Machine

भूमिका: ड्रिलिंग मशीन (Drilling Machine) क्या है?

मैकेनिकल वर्कशॉप और मैन्युफैक्चरिंग में ड्रिलिंग (Drilling) एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। सरल शब्दों में, किसी ठोस धातु, लकड़ी या प्लास्टिक के टुकड़े में बेलनाकार सुराख (Cylindrical Hole) करने की प्रक्रिया को ड्रिलिंग कहते हैं।

इस कार्य के लिए जिस मशीन का उपयोग किया जाता है उसे ड्रिलिंग मशीन कहते हैं। यह मशीन एक कटिंग टूल (जिसे ड्रिल बिट या ट्विस्ट ड्रिल कहते हैं) को तेज़ी से घुमाती है और उस पर नीचे की ओर दबाव (Feed) डालती है, जिससे धातु कटती जाती है और छेद बन जाता है।


1. ड्रिलिंग मशीन के मुख्य भाग (Main Parts)

हालांकि अलग-अलग मशीनों की बनावट अलग हो सकती है, लेकिन एक मानक पिलर ड्रिलिंग मशीन के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:

  • Base (आधार): यह कास्ट आयरन का बना होता है और पूरी मशीन का भार सहता है।
  • Column (स्तंभ): यह एक वर्टिकल पिलर होता है जिस पर टेबल और हेड लगे होते हैं।
  • Work Table: इस पर जॉब को रखकर क्लैंप किया जाता है। इसे ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं घुमाया जा सकता है।
  • Spindle: यह मशीन का वह हिस्सा है जो घूमता है। इसमें ड्रिल चक (Drill Chuck) फिट किया जाता है।
  • Drill Chuck: यह ड्रिल बिट को मजबूती से पकड़ने वाला टूल है।
  • Feed Handle: इस हैंडल को घुमाकर ड्रिल बिट को जॉब के अंदर धकेला जाता है।

2. ड्रिलिंग की प्रक्रिया (Drilling Process Step-by-Step)

एक सटीक सुराख करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

  1. मार्किंग और सेंटर पंचिंग: सबसे पहले ड्राइंग के अनुसार जॉब पर निशान लगाएं। ड्रिलिंग शुरू करने से पहले सेंटर पंच (90°) से एक गहरा गड्ढा बनाना ज़रूरी है, ताकि ड्रिल की नोक इधर-उधर न फिसले।
  2. जंब को बांधना (Work Holding): जॉब को कभी भी हाथ से पकड़कर ड्रिल न करें। इसे ‘मशीन वाइस’ (Machine Vice) या क्लैंप की मदद से टेबल पर मजबूती से जकड़ें।
  3. ड्रिल बिट का चयन: सुराख के साइज के अनुसार सही व्यास (Diameter) का ड्रिल बिट चुनें और उसे चक में ‘चक की’ (Chuck Key) की मदद से टाइट करें।
  4. स्पीड सेट करना: धातु के अनुसार मशीन की गति (RPM) सेट करें। कठोर धातु के लिए कम स्पीड और नरम धातु के लिए अधिक स्पीड रखी जाती है।
  5. ड्रिलिंग शुरू करना: मशीन चालू करें और धीरे-धीरे फीड हैंडल को नीचे लाएं। जब ड्रिल धातु को काटना शुरू करे, तो दबाव स्थिर रखें।
  6. कूलेंट का उपयोग: घर्षण के कारण ड्रिल और जॉब गर्म हो जाते हैं। ड्रिल को जलने से बचाने के लिए पानी या सॉल्युबल ऑयल (Coolant) का उपयोग करते रहें।

3. ड्रिल बिट के प्रकार (Types of Drill Bits)

वर्कशॉप में सबसे ज्यादा ट्विस्ट ड्रिल (Twist Drill) का उपयोग होता है। इसके मुख्य भाग हैं:

  • Shank: जिसे चक में पकड़ा जाता है (Straight shank या Taper shank)।
  • Body: जिस पर फ्लूट्स (Flutes) कटे होते हैं।
  • Flutes: ये घुमावदार नालियां होती हैं जो चिप्स को बाहर निकालने और कूलेंट को अंदर पहुँचाने का काम करती हैं।
  • Point Angle: सामान्य कार्यों के लिए ड्रिल का पॉइंट एंगल 118° होता है।

4. ड्रिलिंग मशीन से होने वाले अन्य ऑपरेशन्स

सिर्फ छेद करना ही नहीं, ड्रिलिंग मशीन पर और भी कई काम किए जा सकते हैं:

  • Reaming (रीमिंग): ड्रिल किए गए छेद को थोड़ा सा बड़ा करके उसे फिनिश और सटीक बनाना।
  • Counter Boring: सुराख के ऊपरी हिस्से को बड़ा करना ताकि बोल्ट का सिर (Head) अंदर बैठ सके।
  • Counter Sinking: सुराख के ऊपरी हिस्से को शंकु (Conical) आकार देना ताकि काउंटर-संक स्क्रू फिट हो सके।
  • Tapping: ड्रिल किए गए छेद के अंदर चूड़ियाँ (Threads) काटना।

5. ड्रिलिंग के दौरान सावधानियाँ (Safety Precautions)

  1. चिप्स को हाथ से छुएं: ड्रिलिंग के दौरान निकलने वाले घुमावदार चिप्स बहुत गर्म और धारदार होते हैं। इन्हें हटाने के लिए ब्रश का उपयोग करें।
  2. ढीले कपड़े और बाल: घूमते हुए स्पिंडल में ढीले कपड़े या लंबे बाल आसानी से फंस सकते हैं, जो घातक हो सकता है।
  3. चक की (Chuck Key): ड्रिल टाइट करने के बाद चाबी को तुरंत चक से निकाल लें।
  4. दबाव कम करें: जब ड्रिल सुराख के बिल्कुल अंत (Exit point) पर पहुँचने वाला हो, तो दबाव कम कर दें, वरना ड्रिल टूट सकता है या जॉब घूम सकता है।

6. स्पीड और फीड की तालिका (Speed & Feed Table)

धातु (Material)कटिंग स्पीड (M/min)कूलेंट (Coolant)
Mild Steel20 – 30सॉल्युबल ऑयल
Cast Iron15 – 20सूखी हवा (Dry)
Aluminium70 – 100मिट्टी का तेल (Kerosene)
Copper35 – 45पानी / तेल

निष्कर्ष

ड्रिलिंग एक बुनियादी लेकिन अत्यंत सटीक इंजीनियरिंग प्रक्रिया है। एक सही सेंटर पंच मार्क और सही कूलेंट का चुनाव आपके ड्रिल बिट की उम्र बढ़ाता है और जॉब को खराब होने से बचाता है। आईटीआई और मैकेनिकल छात्रों को ड्रिलिंग के दौरान मशीन की आवाज़ और चिप्स के रंग को पहचानना सीखना चाहिए, क्योंकि यह मशीन की सही वर्किंग कंडीशन को दर्शाता है।

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