मार्किंग टूल्स (Marking Tools): स्क्राइबर, पंच, V-ब्लॉक और सरफेस प्लेट की पूरी जानकारी

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भूमिका: मार्किंग (Marking) और मार्किंग टूल्स का महत्व

मैकेनिकल वर्कशॉप में किसी भी कच्चे लोहे (Raw Material) के टुकड़े को काटने या मशीनिंग करने से पहले उस पर ड्राइंग के अनुसार रेखाएं खींची जाती हैं। इस प्रक्रिया को मार्किंग (Marking) या लेआउट (Layout) कहा जाता है।

जिस प्रकार एक दर्जी कपड़े को काटने से पहले उस पर चाक से निशान लगाता है, उसी प्रकार एक फिट्टर या मैकेनिक धातु पर स्थायी निशान लगाने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग करता है। इन उपकरणों को मार्किंग टूल्स (Marking Tools) कहते हैं। यदि मार्किंग गलत हो जाए, तो पूरा जॉब खराब हो सकता है, इसलिए इन टूल्स का सही ज्ञान होना अनिवार्य है।


1. स्क्राइबर (Scriber) – धातु की पेंसिल

स्क्राइबर एक साधारण लेकिन बहुत महत्वपूर्ण टूल है। इसे आप “मैकेनिकल पेंसिल” भी कह सकते हैं, लेकिन इसकी नोक लेड (Lead) की नहीं बल्कि कठोर स्टील की होती है।

  • बनावट: यह हाई कार्बन स्टील का बना होता है। इसके दोनों सिरे या एक सिरा नुकीला होता है जिसे $12^\circ$ से $15^\circ$ के कोण पर ग्राइंड किया जाता है।
  • उपयोग: धातु की चमकदार सतह पर बारीक रेखाएं खींचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • प्रकार:
    1. Plain Scriber: साधारण काम के लिए।
    2. Bent Scriber: इसका एक सिरा मुड़ा हुआ होता है, जिसका उपयोग पाइप के अंदर या किसी सुराख की मार्किंग के लिए किया जाता है।
    3. Adjustable Scriber: जिसकी लंबाई कम या ज्यादा की जा सकती है।

punch

2. पंच (Punch) – निशानों को पक्का करना

स्क्राइबर से खींची गई रेखाएं काम के दौरान मिट सकती हैं। उन रेखाओं को स्थायी (Permanent) बनाने के लिए पंच का उपयोग किया जाता है।

  • बनावट: यह हाई कार्बन स्टील की एक षटकोणीय (Hexagonal) या अष्टकोणीय छड़ होती है। इसके ‘पॉइंट’ को हार्ड और टेंपर किया जाता है।
  • मुख्य प्रकार:
    1. Prick Punch: इसका पॉइंट एंगल 30° होता है। इसका उपयोग डिवाइडर की नोक को जगह देने के लिए किया जाता है।
    2. Dot Punch: इसका पॉइंट एंगल 60° होता है। इसका उपयोग मार्किंग रेखाओं को पक्का करने के लिए किया जाता है।
    3. Center Punch: इसका पॉइंट एंगल 90° होता है। इसका उपयोग ड्रिलिंग से पहले सेंटर मार्क करने के लिए होता है ताकि ड्रिल बिट इधर-उधर न फिसले।

v blocks

3. V-ब्लॉक (V-Block) – गोल जॉब का सहारा

मार्किंग करते समय गोल बार या पाइप को स्थिर रखना मुश्किल होता है। यहाँ V-ब्लॉक काम आता है।

  • बनावट: यह अक्सर क्लोज ग्रेन कास्ट आयरन या स्टील का बना एक ब्लॉक होता है जिसकी ऊपरी सतह पर ‘V’ आकार की नाली कटी होती है। यह ‘V’ खांचा आमतौर पर 90° के कोण पर होता है।
  • उपयोग: गोल जॉब (Round bars) को मार्किंग या ड्रिलिंग के समय मजबूती से पकड़ने और सहारा देने के लिए।
  • U-Clamp: जॉब को V-ब्लॉक के साथ फिक्स करने के लिए इसके ऊपर एक ‘U’ आकार का क्लैंप लगाया जाता है।

surface plate

4. सरफेस प्लेट (Surface Plate) – मार्किंग का आधार

सरफेस प्लेट वर्कशॉप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि इसके बिना सटीक मार्किंग संभव नहीं है। यह मार्किंग के लिए डेटम सरफेस’ (Datum Surface) या आधार प्रदान करती है।

  • बनावट: यह कास्ट आयरन, ग्रेनाइट या कांच (Glass) की बनी होती है। इसकी ऊपरी सतह को ‘स्क्रैपिंग’ या ‘लैपिंग’ के माध्यम से बहुत ही समतल (Flat) बनाया जाता है।
  • ग्रेड:
    • Grade A: टूल रूम में मास्टर चेकिंग के लिए।
    • Grade B: वर्कशॉप में साधारण मार्किंग के लिए।
  • उपयोग: जॉब की समतलता (Flatness) चेक करने के लिए और मार्किंग ब्लॉक (Scriber Block) को इस पर रखकर ऊंचाई मापने के लिए।

5. मार्किंग की सही प्रक्रिया (Marking Procedure)

  1. तैयारी: सबसे पहले जॉब की सतह को साफ करें और उस पर मार्किंग मीडिया (जैसे चौक, लेआउट डाई या कॉपर सल्फेट) लगाएं ताकि रेखाएं साफ दिखें।
  2. आधार चुनना: जॉब को सरफेस प्लेट या एंगल प्लेट के सहारे सेट करें।
  3. रेखाएं खींचना: वर्नियर हाइट गेज या स्क्राइबर की मदद से ड्राइंग के अनुसार हल्की रेखाएं खींचें।
  4. पंचिंग: डॉट पंच और छोटे हथौड़े की मदद से खींची गई रेखाओं पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर छोटे गड्ढे (Dots) बनाएं।
  5. जांच: मार्किंग पूरी होने के बाद दोबारा माप लें ताकि कोई गलती न रहे।

6. मार्किंग टूल्स की देखभाल और सुरक्षा

  • स्क्राइबर की सुरक्षा: इसकी नोक बहुत तेज होती है, इसलिए जेब में न रखें। उपयोग न होने पर नोक पर कार्क (Cork) लगा दें।
  • सतह की रक्षा: सरफेस प्लेट पर कभी हथौड़ा न चलाएं और न ही उस पर भारी औजारों को पटकें।
  • जंग से बचाव: काम खत्म होने के बाद सभी टूल्स को साफ करके हल्का तेल या ग्रीस लगाकर रखें।
  • पंच का रखरखाव: यदि पंच का सिर (Head) ‘मशरूम’ की तरह फैल जाए, तो उसे ग्राइंड करके ठीक कर लें, वरना हथौड़े की चोट से चोट लग सकती है।

निष्कर्ष

मार्किंग करना एक कला है। स्क्राइबर, पंच, V-ब्लॉक और सरफेस प्लेट जैसे टूल्स एक मैकेनिक के हाथ और आंखों की तरह काम करते हैं। यदि आपकी मार्किंग सटीक है, तो आपका अंतिम उत्पाद (Final Product) भी एकदम सही बनेगा। आईटीआई और इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए इन टूल्स का व्यावहारिक अभ्यास (Practical Practice) बहुत ज़रूरी है।

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